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Full Information of Dr CV Raman in Hindi:

सर सी.व्ही.रामन(Sir C.V Raman) यह सबसे महान भौतिक शास्त्रज्ञ थे | Nobel पारितोषिक से सम्मानित किए गए वह पहले

भारतीय शास्त्रज्ञ थे | उन्हें यह Nobel पारितोषिक उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण खोज ‘रामन प्रभाव’(Raman Effect) के लिए दिया गया था |

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Sir C.V Raman

उन्होंने कठोर परिश्रम और प्रयोग करके निष्कर्ष निकाला की, प्रकाश किरणें जब किसी नई

चीज में से जाते है तब Spectrum में कुछ नई रेखाएँ दिखती है | यही ‘रामन प्रभाव’(Raman Effect) का आधार था | उनके इसी

संशोधन से पदार्थ की आणविक संरचना समझने में मदद हुई | उन्होंने प्रयोग की पूर्ण शृंखला करके देखी,

जिसमें से उन्होंने सूर्य की प्रकाश किरणों को पाणी, बर्फ और अन्य पारदर्शी माध्यम से पार किया |

सूर्य किरणों के इस प्रयोग से Raman Effect का महत्व बहुत बढ़ा | सर सी.व्ही.रामन ने Magnetism और ध्वनि के क्षेत्र में भी संशोधन किया था | सर रामन ने चुंबक और संगीत के क्षेत्र में संशोधन किया था |

CV Raman Full Form: उनका सम्पूर्ण नाम चंद्रशेखर वेंकट रामन था | उनका जनम १८८८ साल में ‘तिरुचिरापल्ली’ यहाँ हुआ | उनके पिता भौतिक शास्त्र

के प्राध्यापक थे | उनको उनके पिता के तरफ से प्रेरणा और मदद दोनों मिली | १९०४ में Presidency College चेन्नई यहाँ से B.A किया | उन्होंने उम्र के १५ वे साल में Bachelor Degree हासिल

१९०७ में उन्होंने मास्टर डिग्री हासिल की | उन्हें अपनी उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना था | लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण से

उनको विदेश जाने की अनुमति नहीं मिली | उन्होंने बहुत से संशोधन अपनी विद्यार्थी दशा में ही किए थे |

उनका प्रथम लेख ‘Light Diffusion’ यह १९०६ में प्रकाशित हुआ |

१९०७ में Deputy Accountant पद पर कलकत्ता यहाँ नियुक्ति हुई | इस पद पर कार्यरत रहने के बाद भी उनकी

Science के प्रति रुचि कम नहीं हुई | उन्होंने अपना संशोधन कार्य और पढ़ाई शुरू रखी | वह अपने बचे हुए समय में Science Laboratory जाया करते थे | वहाँ उनकी भेंट भौतिक शास्त्रज्ञ ‘आशुतोष मुखर्जी’ के साथ हुई |

जो की वहां एक प्रख्यात वैज्ञानिक थे सर रामन ने १९१७ में अपने Deputy Accountant पद से इस्तीफ़ा दिया

और Kolkata University में भौतिक शास्त्र के प्राध्यापक पद  पर कार्य करना शुरू किया | इसी University की प्रयोग शाला में उन्होंने अपने जीवन काल का महत्वपूर्ण प्रयोग किया | इसके पीछे का कारण भौतिक शास्त्र के प्रति उनकी रुचि थी |

१९२१ में उन्होंने यूरोप का दौरा किया | १९२१ में Royal Society England यहाँ उनकी सदस्य पद पर नियुक्ति हुई, यह एक बहुत बड़ा सम्मान था |

१९४३ में उन्होंने Raman Research Institute की स्थापना Bangalore के पास की | यहाँ उन्होंने डायरेक्टर और भौतिक शास्त्र के मुख्य के रूप में काम किया | इसी संस्था पर उन्होंने अंतिम श्वास तक अपने संशोधन का कार्य पूर्ण किया | १९२७ में उन्हें

Sir C.V Raman with Richard Bar

Sir C.V Raman with Richard Bar

Royal Society of England द्वारा सम्मानित किए गए | उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा King Hood इस सम्मान से भी सम्मानित किया गया था | १९५८ में भारत सरकार ने उन्हें भारत रत्न पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया था |

१९७० में इन महान शास्त्रज्ञ का निधन हुआ | ऐसे महान शास्त्रज्ञ को सम्पूर्ण भारत वर्ष के ओर से शत: शत: नमन !

आज भौतिक विज्ञान में रुचि रखने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को इनके पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करना चाहिए |

 

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