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भारत की नई राष्ट्रपति कौन है? और क्या है इनकी कहानी यह जानने की जिज्ञासा तो आपके मन में हो ही रही होगी | इस लिए आज Feelbywords.com आपके लिए लेकर आए है ‘Biography of President Draupadi Murmu in Hindi’ | इस आर्टिकल में आप जानेंगे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सम्पूर्ण जीवन परिचय | तो बने रहिए हमारे साथ……

Biography of President Draupadi Murmu in Hindi

हम जिस देश में रहते है | उस देश के प्रथम पद पर, संवैधानिक सर्वोच्च पद पर किसकी नियुक्ति की गई है?   देश के प्रथम नागरिक होने के अधिकार किसे दिया गया है? इन सवालों के जवाब जानने के हक देश के हर नागरिक को है | बहुत सारे लोग यह जानने के प्रयास कर रहे है | अभी देश के प्रथम सर्वोच्च पद पर राष्ट्रपति पद के लिए जिस उमेदवार की नियुक्ति की गई है उनका नाम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू है |

द्रौपदी मुर्मू, जी हाँ द्रौपदी मुर्मू | अभी-अभी २५ जुलाई २०२२ को यह भारत के राष्ट्रपति के रूप में भारत के सर्वोच्च पद पर आसीन हुई है | श्री रामनाथ कोविंद का कार्यकाल समाप्त हो गया है इसलिए इस पद पर एक  नए   राष्ट्रपति की जरूरत थी | इस पद के लिए श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का चुनाव किया गया है अपने देश के  नए  राष्ट्रपति के बारे में जानने के लिए बहुत सारे लोग उत्सुक है और आजकल इनके बारे में इंटरनेट पर सर्च कर रहे है |

तो चलिए हम आपकी उत्सुकता का इंतजार खत्म कर देते है | आज हम आपको इस आर्टिकल में श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के सम्पूर्ण जीवन के बारे में जानकारी देने जा रहे है |

१] क्या विशेषता है भारत की नई और १५वी राष्ट्रपति की?


श्रीमती द्रौपदी मुर्मू भारत की १५ वी और वर्तमान राष्ट्रपति रूप में अभी-अभी २५ जुलाई २०२२ को इस पद पर एक नए राष्ट्रपति के रूप में आसीन हुई है | वह भारतीय जनता पार्टी की सदस्य है | वह भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने वाले आदिवासी अनुसूचित जनजातीय संथाल समुदाय से संबंधित है |श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, प्रतिभाताई पाटील के बाद दूसरी महिला राष्ट्रपति बनी है और आदिवासी प्रथम महिला राष्ट्रपति बनी है |

वह इस पद को संभालने वाली ओडिशा की पहली व्यक्ति है और देश की सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति बनी है | इनकी उम्र अब ६४ साल है और यह अब देश के सर्वोच्च पद पर आसीन होकर देश की प्रथम नागरिक बनी है |  श्रीमती मुर्मू भारत की आजादी के बाद पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति है |

राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने साल २००० से २००४ के बीच ओडिशा सरकार के मंत्रिमंडल में विभिन्न विभागों में कार्यरत थी | वह साल २०१५ से २०२१ तक झारखंड राज्य की नौवें राज्यपाल के रूप में कार्यरत थी | अभी इन्होंने २५ जुलाई २०२२ को पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद  के उत्तराधिकारी बनकर कार्यभार संभाला है |

२] कैसा रहा भारत की नई राष्ट्रपति का बचपन?

भारत की नई राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू जी का जन्म २० जून १९५८ को ओडिशा के मयूरभंज जिले के ‘बैदापोसी’ गांव में एक आदिवासी संथाल परिवार में हुआ | उनके पिता क नाम ‘बिरंचि नारायण टुडू’ था | जो की एक किसान थे | उनके दो भाई है | भगत टुडू और सरैनी टुडू | उनका बचपन बहुत ही गरीब परिस्थिति में बिता |

३] कैसे बानी श्रीमती मुर्मू जी अपने गांव की पहली आदिवासी महिला ग्रेजुएट?

उनकी स्कूली पढ़ाई गांव में ही हुई | साल १९६९ से १९७३ तक वह आदिवासी आवासीय विद्यालय में पढ़ी | इसके बाद कला स्नातक में ग्रेजुएशन करने के लिए उन्होंने भुवनेश्वर के  रामादेवी  वुमंस कॉलेज में दाखिला ले लिया |  श्रीमती द्रौपदी मुर्मू अपने गांव की पहली लड़की थी, जो ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए भुवनेश्वर तक पहुंची थी |

४] क्या था श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के विवाह का रोचक किस्सा?

कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात श्यामचरण मुर्मू से हुई | उनकी मुलाकातें बढ़ी, दोस्ती हुई,  दोस्ती प्यार में बदल गई | श्यामचरण भी उस वक्त भुवनेश्वर के एक कॉलेज से पढ़ाई कर रहे थे | दोनों शादी करना चाहते थे लेकिन इस शादी के लिए श्रीमती मुर्मू के पिताजी की मंजूरी नहीं थी |

परिवार की रजामंदी के लिए श्यामचरण विवाह का प्रस्ताव लेकर द्रौपदी मुर्मू के घर पहुंच गए | श्यामचरण के कुछ रिश्तेदार द्रौपदी मुर्मू के गांव में ही रहते थे | ऐसे में अपनी बात रखने के लिए श्यामचरण अपने चाचा और रिश्तेदारों के साथ उनके घर गए | परन्तु द्रौपदी मुर्मू के पिता ने इस रिश्ते से इनकार कर दिया |

लेकिन श्यामचरण भी पीछे हटने वालों में से नहीं थे | उन्होंने तय कर लिया था की वह शादी करेंगे तो द्रौपदी मुर्मू से ही करेंगे | श्यामचरण ने तीन दिन तक द्रौपदी मुर्मू के गांव में ही डेरा  डाल  लिया | थक-हारकर द्रौपदी मुर्मू के पिता ने इस रिश्ते को मंजूरी दे दी | दरअसल द्रौपदी मुर्मू जिस आदिवासी संथाल समुदाय से आती है उसमें लड़के वालों को दहेज देना पड़ता है | इसमें तय हुआ की श्यामचरण के घर से द्रौपदी मुर्मू को एक गाय एक बैल और १६ जोड़ी कपड़े दिए जाएंगे | कुछ दिन बाद उनका विवाह हो गया |

५] कैसे अपने प्रिय-अपनों को खोया, श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने?

एक समय उनके जीवन में ऐसा आया की उनके ऊपर एक के बाद एक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था | वह पूरी तरह टूट गई थी |  १९८४ में उनकी छोटी बेटी की तीन साल की उम्र में मौत हो गई | इसके बाद २००९ में उनको जीवन का बड़ा दर्द झेलना पड़ा | उनके २५ साल के बेटे लक्ष्मण की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई | लक्ष्मण अपने चाचा-चाची के साथ रहते थे |

बताया जाता है कि लक्ष्मण शाम को अपने दोस्तों के साथ गए थे | देर रात एक ऑटो से उनके दोस्त घर छोड़कर गए | उस वक्त लक्ष्मण कि स्थिति ठीक नहीं थी | चाचा-चाची के कहने पर दोस्तों ने लक्ष्मण को उनके कमरे में लिटा दिया | उस वक्त घरवालों को लगा कि थकान की वजह से ऐसा हुआ है | लेकिन सुबह बेड पर लक्ष्मण अचेत मिले | घरवाले डॉक्टर के पास ले गए,  तब तक उनकी मौत हो चुकी थी | इस रहस्यमय मौत का खुलासा अब तक नहीं हो पाया है |

चार साल के अंतर से उनके दोनों जवान बेटों की मौत हो गई वह पूरी तरह से टूट चुकी थी | बेटे की मौत से वह उभर भी नहीं पाई थी की उन्हें दूसरी झकझोर देने वाली खबर मिली | २०१३ में उनके दूसरे बेटे की मौत एक सड़क दुर्घटना में हो गई |

दो बेटों की मौत का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि २०१४ में द्रौपदी के  पति  श्यामचरण मुर्मू कि भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई | श्यामचरण बैंक में काम करते थे | अब द्रौपदी के परिवार में केवल एक बेटी इतिश्री है | इतिश्री बैंक में नौकरी करती है, उसका विवाह हो गया है |  बेटी को पढ़ाने के लिए द्रौपदी ने शिक्षिका कि नौकरी कि थी |

६] कैसे तय किया श्रीमती मुर्मू जी ने एक पार्षद से राष्ट्रपति तक का सफर?

राजनीति में आने से पहले श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने एक शिक्षिका के तौर पर अपने करिअर कि शुरुवात कि थी |  उन्होंने १९७९ से १९८३ तक सिंचाई और बिजली विभाग में जूनियर असिस्टेंट के रूप में कार्य किया | इसके बाद १९९४ से १९९७ तक उन्होंने ऑनरेरी असिस्टेंट टीचर [सहाय्यक शिक्षिका] के रूप में कार्य किया |  १९९७ में उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा | ओडिशा के राइरांगपुर जिले में पार्षद चुनी गई |  इसके बाद वह जिला परिषद कि उपाध्यक्ष भी चुनी गई |

साल २००० में वह विधानसभा चुनाव लड़ी |  राइरांगपुर विधानसभा से विधायक चुने जाने के बाद उन्हें बीजद और भाजपा गठबंधन वाली सरकार में स्वतंत्र  प्रभार का राज्यमंत्री बनाया गया |

साल २००२ में श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को ओडिशा सरकार में मत्स्य और पशुपालन विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया |२००६ में उन्हें भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया |

२००९ में वह राइरांगपुर विधानसभा से दूसरी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीती | इसके बाद वह २००९ में लोकसभा चुनाव भी लड़ी, लेकिन जीत नहीं पाई |

२०१५ में द्रौपदी मुर्मू को झारखंड का राज्यपाल बनाया गया | २०२१ तक उन्होंने राज्यपाल पद का कार्यभार संभाला |

२०२२ में राष्ट्रपति का चुनाव जीतने के साथ ही वह देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बन गई | इसके अलावा  देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव भी प्राप्त किया | ६४ साल की द्रौपदी राष्ट्रपति पद पर पहुंचने वाली  सबसे कम उम्र की व्यक्ति है |

७]  कैसे श्रीमती मुर्मू जी ने मतदान के तीसरे ही चरण में प्राप्त कर ली विजय?

२१ जुलाई २०२२ को सुबह ११ बजे शुरू हुई गिनती में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस [एनडीए] की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू ने यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस [यूपीए] के उमेदवार यशवंतसिंह को तीसरे चरण की गिनती में हरा दिया |  उनको जीत के लिए जरूरी ५ लाख ४३ हजार २६१ वोट तीसरे चरण में ही मिल गए | तीसरे चरण में उन्हें ५ लाख ७७ हजार ७७७ वोट मिले |

यशवंत सिन्हा इस चरण में २ लाख ६१ हजार ६२ वोट ही जुटा सके | इसमें राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों समेत २० राज्यों के वोट शामिल थे |

राष्ट्रपति चुनाव के वोटों की गिनती देर रात ४ चरणों में पूरी हुई | कुल ४,७५४ वोट पड़े थे | गिनती के वक्त ४,७०१ वोट वैध और ५३ अमान्य पाए गए | कुल वोटों का कोटा ५,२८,४९१ था | इसमें द्रौपदी मुर्मू को कुल २८२४ वोट मिले | इनकी वैल्यू ६ लाख ७६ हजार ८०३ थी | केरल से उनको सबसे कम सिर्फ एक और उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा २८७ वोट मिले |

यशवंत सिन्हा को कुल १८७७ वोट मिले, जिनकी वैल्यू ३ लाख ८० हजार १७७ रही | दूसरी तरफ सिन्हा को आंध्र प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम से एक भी वोट नहीं मिले | जबकि उन्हें सबसे ज्यादा वोट पश्चिम बंगाल से मिले |

वोट प्रतिशत की बात करें तो द्रौपदी मुर्मू को ६४ प्रतिशत और यशवंत सिन्हा को ३६ प्रतिशत वोट मिले |

यशवंत सिन्हा ने अपनी हार स्वीकार की | उन्होंने कहा, “द्रौपदी मुर्मू को उनकी जीत पर बधाई देता हूँ | देश को उम्मीद है कि गणतंत्र के १५ वें राष्ट्रपति के रूप में बिना किसी भय और पक्षपात के संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करेंगी” |

श्रीमती द्रौपदी मुर्मू कि इस ऐतिहासिक जीत पर बधाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जे. पी. नड्डा ने द्रौपदी मुर्मू के घर जाकर उन्हें बधाई दी |  श्रीमती द्रौपदी मुर्मू देश कि अगली राष्ट्रपति बन गई है | तीसरे चरण में ही उन्होंने निर्णायक जीत हासिल कर ली |

एक समय था आदिवासी समुदाय से आने वाली मुर्मू झोपडी में रहती थी | अब उन्होंने ३४० कमरों के आलीशान राष्ट्रपति भवन तक का सफर तय कर लिया है | मुर्मू का यह सफर इतना आसान भी नहीं है | यहां तक पहुंचने के लिए मुर्मू ने न जाने कितनी तकलीफें झेली है |

इस सफर में उनके कई अपने भी बिछड़ गए | कष्ट तो उन्हें इतना मिला कि कोई आम इंसान कब का टूट गया होता | फिर भी मुर्मू ने न केवल संघर्ष जारी रखा बल्कि देश के संवैधानिक सर्वोच्च पद तक पहुंचने में कामयाब भी हुई | आज मुर्मू न केवल भारत,  बल्कि दुनिया भर के अरबों लोगों के लिए एक मिसाल बन चुकी है |

दोस्तों मैं उम्मीद करता हूँ के आपको हमारा ‘Biography of President Draupadi Murmu in Hindi’ यह लेख पसंद आया होगा | आप हमारे अन्य मशहूर लेख –

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